व्याख्या
सावेद्रा स्थिति केवल चार मोहरों वाला एक रचा हुआ अध्ययन है: सफेद राजा और प्यादा बनाम काला राजा और हाथी। अध्ययन ऐसी बनाई हुई स्थिति होती है जिसे किसी अनोखे या खास शिक्षाप्रद हल के लिए तैयार किया जाता है। देखने में हाथी प्यादे को रोकता हुआ लगता है, लेकिन सफेद शहों की गणना और पदोन्नति की सही गोटी चुनकर जीत सकता है।
जब प्यादा आखिरी रैंक पर पहुँचता है, तो वह वज़ीर, हाथी, ऊँट या घोड़े में बदल सकता है। सामान्य चुनाव वज़ीर होता है, लेकिन यहाँ वह हारता है। में c8=Q का मतलब है कि प्यादा c8 पर पहुँचकर वज़ीर बनता है। ? चिह्न गलती दिखाता है। 6.c8=Q? के बाद काले के पास 6...Rc4+ है, और 7.Qxc4 के बाद गतिरोध हो जाता है क्योंकि काला राजा शह में नहीं होता और उसके पास कोई कानूनी चाल नहीं रहती।
समाधान 6.c8=R है, यानी हाथी में पदोन्नति। इससे जीत बनी रहती है और वही गतिरोध फंदा नहीं मिलता। 6...Ra4 7.Kb3 के बाद काला हाथी सफेद की धमकियों के सामने बच नहीं सकता। शिक्षा यह नहीं कि तमाशे के लिए कमज़ोर गोटी चुनो, बल्कि यह है कि हर पदोन्नति विरोधी के लिए कौन-कौन से कानूनी जवाब छोड़ती है, यह देखो।
फर्नांडो सावेद्रा ने 1895 में यह संभावना खोजी, जब इस स्थिति को पहले ड्रॉ बताया गया था। यह अध्ययन अंडरप्रमोशन का क्लासिक उदाहरण बन गया, यानी ऐसी पदोन्नति जिसमें वज़ीर के अलावा कोई दूसरी गोटी चुनी जाती है।
सामान्य भ्रम
प्यादे को हमेशा वज़ीर बनाना चाहिए
वज़ीर अक्सर सबसे अच्छा होता है, लेकिन वह गतिरोध या कोई तरकीब दे सकता है। सावेद्रा में खास तौर पर हाथी चाहिए।
अंडरप्रमोशन केवल दिखावा है
यहाँ हाथी कानूनी स्थिति बदल देता है और काले के बचाव उपाय को हटा देता है। इसके बिना विषयगत जीत बनती ही नहीं।
स्रोत
- 1.Welcome to 2014, Chess.com
- 2.Saavedra position, Wikipedia
- 3.FIDE Laws of Chess taking effect from 1 January 2023, FIDE
