व्याख्या
अमर बाजी 1851 में London में खेली गई Adolf Anderssen की Lionel Kieseritzky पर जीत है। यह उस भारी सामग्री के लिए प्रसिद्ध हुई जिसे Anderssen ने आक्रमण के दौरान जाने दिया: दोनों रुख और अंत में अपनी क्वीन। शतरंज में बलिदान का अर्थ जानबूझकर सामग्री देना है। सामग्री मोहरों से दर्शाए गए मूल्य को कहते हैं। इसके बदले आक्रमण के लिए समय, बचे हुए मोहरों के लिए खुली राहें या राजा के विरुद्ध धमकियां जैसी दूसरी बढ़त हासिल की जाती है।
समापन बताता है कि यह बाजी उन्नीसवीं सदी के आक्रामक शतरंज का प्रतीक क्यों बनी। सामग्री में बहुत पीछे होने के बावजूद Anderssen के बचे हुए मोहरे मिलकर चेकमेट करते हैं। प्रसिद्ध होने का अर्थ यह नहीं कि बाद के विश्लेषण के अनुसार हर चाल त्रुटिहीन है। इसका ऐतिहासिक महत्व संयोजन की कल्पना और सुंदरता में है, न कि इसे त्रुटिरहित बाजी मानने में।
यह 1956 की नहीं है। दोनों शानदार संयोजनों के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन वे पूरी तरह अलग खिलाड़ियों, युगों और संदर्भों से संबंधित हैं।
सामान्य भ्रम
सदी की बाजी
अमर बाजी 1851 की Anderssen-Kieseritzky बाजी थी। सदी की बाजी 1956 की Byrne-Fischer बाजी थी।
शब्द देखेंस्रोत
- 1.The Immortal Game (Anderssen v Kieseritzky), Edward Winter, Chess Notes
