व्याख्या
1870 में सेगेड में जन्मे गेज़ा मारोची 20वीं सदी के आरंभ में दुनिया के सबसे मजबूत खिलाड़ियों में से एक बने। उन्होंने बड़े टूर्नामेंटों में अनेक प्रथम और द्वितीय स्थान हासिल किए तथा के साथ खिताबी मुकाबले पर बातचीत की, लेकिन व्यवस्थाएँ पूरी नहीं हुईं और मैच कभी नहीं खेला गया।
उनका शतरंज खानों के नियंत्रण, सुरक्षा और सटीक एंडगेम तकनीक के लिए जाना जाता था। एंडगेम वह चरण है जिसमें कम गोटियाँ बचती हैं और हर प्यादे का महत्व बढ़ जाता है। उनका नाम मारोची बाइंड से भी जुड़ा है, जो ऐसी संरचना है जिसमें सफेद सामान्यतः c4 और e4 पर प्यादे रखते हैं। हर खाने के नाम में फ़ाइल का अक्षर और क्षैतिज पंक्ति की संख्या होती है। ये दोनों प्यादे काले के लिए स्थान और खुली लाइनें बनाने वाली चालें कठिन कर देते हैं, विशेष रूप से प्यादे को d5 तक आगे बढ़ाना। ऐतिहासिक संबंध वास्तविक है, हालाँकि यह प्रणाली कई विश्लेषकों और खिलाड़ियों के कार्य से विकसित हुई।
मारोची का प्रशिक्षक के रूप में भी सीधा प्रभाव था। उन्होंने की सहायता की, जो पहली महिला विश्व चैंपियन बनीं और ओपन टूर्नामेंटों में सफलतापूर्वक खेलीं। परिणामों, रणनीतिक विचारों और शिक्षण का यह मेल बताता है कि उनकी विरासत उनके नाम वाली प्यादा-संरचना से कहीं व्यापक है।
सामान्य भ्रम
मारोची केवल प्यादा-संरचना का नाम है
मारोची बाइंड उनके नाम पर है, लेकिन गेज़ा मारोची अभिजात खिलाड़ी और प्रभावशाली प्रशिक्षक थे।
वे विश्व चैंपियन थे
लास्कर के साथ मैच पर चर्चा हुई थी, लेकिन वह कभी खेला नहीं गया। मारोची ने विश्व खिताब नहीं रखा।
स्रोत
- 1.Géza Maróczy, Chess Notes (Edward Winter)
- 2.Geza Maroczy, Chess.com
- 3.Maróczy Géza névadónk, Maróczy Géza Sportegyesület
