व्याख्या
रुडोल्फ स्पीलमान से जुड़ी ऐतिहासिक वर्गीकरण-प्रणाली में वास्तविक बलिदान सचमुच मटीरियल, यानी मोहरे या प्यादे, छोड़ता है। कोई ऐसी छोटी श्रृंखला नहीं होती जिसे प्रतिद्वंद्वी टाल न सके और जो तुरंत वापसी की गारंटी दे। प्रतिफल स्थायी आक्रमण, असुरक्षित शत्रु राजा, अधिक सक्रियता, खानों का नियंत्रण या , यानी उत्तर माँगने वाली समस्याएँ खड़ी करने की क्षमता, हो सकता है।
यह उसे आभासी या दिखावटी बलिदान से अलग करता है, जिसमें दिया गया मोहरा जल्दी वापस जीत लिया जाता है या गणना योग्य श्रृंखला मात पर समाप्त होती है। वास्तविक बलिदान में अधिक अनिश्चितता होती है और उसका मूल्यांकन कई चालों तक बने कारकों पर निर्भर करता है। या वास्तविक हो सकता है, लेकिन मोहरे का नाम और प्रतिफल की प्रकृति अलग पहलुओं का वर्णन करते हैं।
वास्तविक शब्द का अर्थ अपने आप सही नहीं है। बलिदान सही, संदिग्ध या गलत हो सकता है। उसे परखने के लिए छोड़े गए मटीरियल की तुलना मिली सक्रियता की गुणवत्ता और अवधि, प्रतिद्वंद्वी के रक्षात्मक संसाधनों तथा आदान-प्रदान के बाद आक्रमण बुझने की संभावना से करें।
प्रयोग और संदर्भ
यह ऐतिहासिक और सैद्धांतिक शब्द है। आधुनिक खिलाड़ी सामान्य शब्द बलिदान की तुलना में इसका कम उपयोग करते हैं।
सामान्य भ्रम
वास्तविक और सही
वास्तविक प्रतिफल की गैर-तात्कालिक प्रकृति बताता है। सही यह बताता है कि वह प्रतिफल वस्तुनिष्ठ रूप से पर्याप्त है या नहीं। वास्तविक बलिदान गलत भी हो सकता है।
स्रोत
- 1.Remembering Rudolf Spielmann (5. May 1883 - 20. August 1942), ChessBase
- 2.Sacrifice, Chess.com
