व्याख्या
डेविड ब्रॉन्स्टीन एक सोवियत ग्रैंडमास्टर थे, जो कल्पनाशीलता, असंतुलित स्थितियों को तलाशने की इच्छा और विचारों को असाधारण स्पष्टता से समझाने के लिए जाने जाते थे। असंतुलित स्थिति वह होती है जिसमें दोनों खिलाड़ियों के पास अलग प्रकार के लाभ हों, जैसे अधिक स्थान के मुकाबले बेहतर प्यादा-संरचना।
1951 में उन्होंने विश्व चैंपियन मिखाइल बोटविन्निक को चुनौती दी। मैच 12 से 12 पर समाप्त हुआ और उस समय लागू नियमों के अनुसार बराबरी होने पर चैंपियन खिताब रख सकता था। इस प्रकार ब्रॉन्स्टीन चैंपियन बनने से आधा अंक दूर रहे, क्योंकि किसी भी चरण में एक अतिरिक्त जीत अंतिम परिणाम बदल देती।
वे 1953 के ज़्यूरिख अंतरराष्ट्रीय शतरंज टूर्नामेंट की पुस्तक से भी घनिष्ठ रूप से जुड़े। उसकी टिप्पणियाँ केवल चालें नहीं बतातीं, बल्कि योजनाएँ, संदेह और व्यावहारिक निर्णय समझाती हैं। इससे यह कृति शतरंज लेखन का प्रभावशाली आदर्श बन गई।
सामान्य भ्रम
ब्रॉन्स्टीन विश्व चैंपियन बने थे
उन्होंने खिताब के लिए चुनौती दी और 1951 का मैच बराबर किया, लेकिन नियमों ने बोटविन्निक को खिताब बनाए रखने दिया।
स्रोत
- 1.David Ionovich Bronstein, Encyclopaedia Britannica
- 2.The Oxford Companion to Chess, Oxford University Press
