व्याख्या
थ्री-चेक में मोहरों की चाल, शह और मात के सामान्य नियम बने रहते हैं, लेकिन जीतने का एक और मुख्य तरीका जुड़ जाता है: बाजी के दौरान विरोधी राजा को तीन बार शह देने वाला पहला खिलाड़ी बनना। शह का अर्थ है कि किसी कानूनी चाल के बाद राजा पर आक्रमण हो और उसे मानक शतरंज की तरह उत्तर देना पड़े।
विरोधी राजा को शह में छोड़ने वाली हर चाल गिनती में केवल एक शह जोड़ती है। यदि एक ही चाल डबल चेक पैदा करे, अर्थात दो मोहरे राजा पर एक साथ आक्रमण करें, तो भी वह एक शह ही गिनी जाती है क्योंकि राजा पर आक्रमण एक ही चाल से हुआ।
तीसरी शह कानूनी होते ही तुरंत जीत देती है, भले ही विरोधी राजा अगली चाल में अन्यथा बच सकता हो। सामान्य मात भी जीत का वैध तरीका बनी रहती है, इसलिए पहले मात मिल जाए तो तीन शह तक पहुँचना आवश्यक नहीं है।
जैसे वैरिएंट के विपरीत, यहाँ अतिरिक्त लक्ष्य इस बात पर निर्भर करता है कि आप विरोधी राजा पर कितनी बार आक्रमण करते हैं, न कि अपने राजा को किसी विशेष खाने तक पहुँचाने पर।
सामान्य भ्रम
डबल चेक
डबल चेक गिनती में दो नहीं जोड़ता। यदि एक चाल से दो मोहरे राजा पर आक्रमण करें, तो वह चाल फिर भी एक ही शह गिनी जाती है।
स्रोत
- 1.Three-Check, Lichess
- 2.3 Check Chess, Chess.com
