व्याख्या
अपने मूल रूप में विकर्ण विपक्ष तब होता है जब दोनों राजा एक ही विकर्ण पर हों और उनके बीच एक खाली खाना हो। वे सीधे किसी रैंक या फाइल पर एक-दूसरे को नहीं रोकते, लेकिन दूरी और चाल-क्रम तय करते हैं कि स्थिति को किस दिशा में बदला जा सकता है।
खुली स्थिति में आम तौर पर जिस खिलाड़ी की चाल नहीं होती, उसके पास विकर्ण विपक्ष होता है। अगर विरोधी राजा किसी एक दिशा में बढ़े, तो दूसरा ऐसा जवाब दे सकता है कि राजा किसी उपयोगी रैंक या फाइल पर में पहुँच जाएँ। इस वजह से विकर्ण विपक्ष अक्सर दो रास्तों के बीच पुल का काम करता है।
दिशा मायने रखती है
हर रूपांतरण समान मूल्य का नहीं होता। आक्रमण करते समय राजा को इस संबंध को उस क्षेत्र या की ओर मोड़ना चाहिए जहाँ उसे घुसना है। बचाव करते समय उसे उस रास्ते की ओर मोड़ना चाहिए जो विरोधी राजा को रोकता हो। गलत दिशा में ज्यामिति बनाए रखना वही महत्वपूर्ण खाना छोड़ सकता है जिसे बचाना था।
भी कभी-कभी राजाओं के पास आने से पहले विकर्ण संबंध से गुजरता है। हर तरह के की तरह प्यादे, बोर्ड के किनारे और प्रतीक्षा-चालें परिणाम बदल सकती हैं, इसलिए सही जवाब हमेशा वास्तविक स्थिति देखकर ही तय करना चाहिए।
सामान्य भ्रम
कोई भी विकर्णीय जमावट
सिर्फ इतना कि दोनों राजा एक ही विकर्ण पर हैं, पर्याप्त नहीं है। दूरी और चाल-क्रम सही होना चाहिए, और रूपांतरण किसी उपयोगी रास्ते को नियंत्रित करना चाहिए।
स्रोत
- 1.Opposition - Chess Terms, Chess.com
- 2.Opposition, Chess Programming Wiki
