व्याख्या
लुई-शार्ल माहे द ला बूर्दोने एक फ़्रांसीसी उस्ताद थे, जिन्होंने आधिकारिक विश्व चैंपियनशिप के अस्तित्व से पहले प्रतिस्पर्धी शतरंज पर प्रभुत्व रखा। हाल के ऐतिहासिक शोध उनके जन्म को 1797 में पेरिस में रखते हैं। उनकी मृत्यु 1840 में लंदन में हुई। उनका उपनाम ला बूर्दोने और लाबूर्दोने सहित कई रूपों में लिखा जाता है।
उनकी केंद्रीय प्रतिस्पर्धी विरासत 1834 में लंदन में आयरिश खिलाड़ी अलेक्ज़ेंडर मैकडॉनेल के विरुद्ध श्रृंखला है। उन्होंने छह मैचों में कुल 85 बाज़ियाँ खेलीं, वह भी शतरंज घड़ियों के बिना और आज की तुलना में बहुत कम मानकीकृत परिस्थितियों में। ला बूर्दोने का समग्र परिणाम बेहतर रहा। बाज़ियों को दर्ज करके फैलाया गया, जिससे बाद की पीढ़ियाँ उनके आक्रमण और प्यादा-दौड़ों का अध्ययन कर सकीं। प्यादा-दौड़ ऐसी स्थिति है जिसमें दोनों पक्ष पहले अंतिम पंक्ति तक पहुँचकर प्यादे को वज़ीर, हाथी, ऊँट या घोड़े में बदलने की कोशिश करते हैं।
इस श्रृंखला को कभी-कभी अनौपचारिक विश्व चैंपियनशिप कहा जाता है। यह वाक्यांश उस समय दोनों खिलाड़ियों को सबसे मजबूत माने जाने को दर्शाता है, लेकिन आधिकारिक तब मौजूद नहीं थी। ला बूर्दोने ने 1836 में शुरू हुई ले पालामेद का संपादन भी किया, जिसे शतरंज को समर्पित शुरुआती पत्रिकाओं में गिना जाता है। इससे उस्तादों की बाज़ियाँ सार्वजनिक अध्ययन सामग्री बनने लगीं।
प्रयोग और संदर्भ
उनका युग शतरंज घड़ियों, औपचारिक क्वालिफिकेशन चक्रों और मानकीकृत मैच नियमों से पहले का था।
सामान्य भ्रम
वे आधिकारिक विश्व चैंपियन थे
उस समय कोई आधिकारिक विश्व खिताब मौजूद नहीं था। उन्हें अपने युग का प्रमुख खिलाड़ी कहा जा सकता है, लेकिन आधुनिक चैंपियनशिप का धारक नहीं।
स्रोत
- 1.Louis Charles Mahé de Labourdonnais, Chess Notes (Edward Winter)
- 2.In The Beginning: La Bourdonnais vs. McDonnell, London 1834, ChessBase
