व्याख्या
गैरी कास्पारोव (जन्म 1963) ने चक्र जीता, जो तय करता है कि विश्व चैंपियन को कौन चुनौती दे सकता है। 1984 में अनातोली कार्पोव के विरुद्ध पहला मैच अधूरा समाप्त होने के बाद उन्होंने 1985 में उन्हें 13-11 से हराया। वे उस समय तक के सबसे युवा विश्व चैंपियन बने और बाद के तीन मैचों में कार्पोव के विरुद्ध ताज बचाया।
कास्पारोव ने गतिशील खेल को अत्यंत गहरी ओपनिंग तैयारी से जोड़ा। ओपनिंग बाजी का शुरुआती चरण है। इसकी तैयारी का अर्थ संभावित स्थितियों, विचारों और ठोस चाल-श्रृंखलाओं का पहले से अध्ययन करना है। कास्पारोव इस तैयारी से सक्रिय स्थितियां प्राप्त करते और फिर गणना तथा मोहरों के समन्वय से उनका लाभ उठाते हुए पहल बनाए रखते थे। पहल ऐसी धमकियां बनाने की क्षमता है जो विरोधी को जवाब देने पर मजबूर करें।
1993 में कास्पारोव और नाइजल शॉर्ट ने अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ FIDE के बाहर अपना खिताबी मैच खेला। इससे दो प्रतिद्वंद्वी धाराओं में बंट गया। कास्पारोव ने सामान्यतः क्लासिकल कही जाने वाली धारा तब तक रखी जब तक 2000 में व्लादिमीर क्रामनिक ने उन्हें हराया। चैंपियनशिप खिताब 2006 तक पुनः एकीकृत नहीं हुए।
कंप्यूटर शतरंज के इतिहास में भी उनका मुख्य स्थान है। 1997 में वे IBM के Deep Blue से छह बाजियों का मैच हार गए। यह पहला कंप्यूटर सिस्टम था जिसने मानक टूर्नामेंट समय नियंत्रण वाले मैच में मौजूदा विश्व चैंपियन को हराया। यह आज के तक पहुंचने की दिशा में ऐतिहासिक पड़ाव था। ये प्रोग्राम अत्यंत गहराई तक स्थितियों की गणना और मूल्यांकन करते हैं।
स्रोत
- 1.Garry Kasparov, FIDE Open Chess Museum
- 2.Deep Blue, IBM
- 3.FIDE History, FIDE Open Chess Museum
